निसंदेह, जनशक्ति किसी भी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण संसाधन होती है । प्रचुर मात्रा में प्रशिक्षित जनशक्ति की आपूर्ति किसी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी के अस्तित्व के बजाए उसकी सफलता के लिए अनिवार्य होती है ।
ग्रेटर नोएडा को प्रचुर मात्रा में कुशल और अर्ध-कुशल जनशक्ति उपलब्ध होने का लाभ है जो उसे ग्रेटर नोएडा और अपने पड़ोसी गाजियाबाद तथा नोएडा से उपलब्ध हो रही है जहां पहले से ही कई सूचना प्रौद्योगिकी और इंजीनियरी कॉलेज चल रहे हैं ।
नॉलेज पार्क
ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण एक ”नॉलेज पार्क” भी विकसित कर रहा है । इसका उद्देश्य शिक्षा एवं शोध के लिए बेहतर संस्थागत सुविधाएं उपलब्ध कराना है ।
ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने नॉलेज पार्क के लिए 1400 एकड़ जमीन निर्धारित की है । 340 संस्थाओं को जमीन पहले ही आबंटित की जा चुकी है । ये संस्थाएं हैं : स्कूल, प्रबंधन संस्थान, व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थान, नि:शक्त व्यक्तियों के लिए संस्थान, मेरीटाइम संस्थान आदि ।
- 9 इंजीनियरी कॉलेज पहले से ही चल रहे हैं तथा दस और इंजीनियरी कॉलेजों का निर्माण कार्य चल रहा है
- रुड़की आईआईटी के आई टी परिसर का निर्माण चल रहा है ।
- 1870 एकड़ भूमि को मास्टर प्लान के नॉलेज पार्क I, II, III, IV के रुप में विकसित किया गया है । और 1000 एकड़ भूमि को नॉलेज पार्क V के रुप में विकसित किया जा रहा है ।
हाईटेक शहर
ग्रेटर नोएडा में हाईटेक सिटी एक एकीकृत परिसर होगा जहां न केवल अनेक प्रौद्योगिकी कंपनियां होंगी बल्कि उनके लिए बाजार और सामाजिक अवसंरचना भी उपलब्ध होगी । यह अपने आप में एक लघु शहर होगा जहां सभी मूलभूत आवश्यकताएं उपलब्ध होंगी ।
यह हाईटेक सिटी संरुपण अर्थात् निर्मित क्षेत्र और विकसित भूखंडों के अनुपात के आधार पर 100 से 500 एकड़ में फैला होगा ।
इस विशाल क्षेत्रफल के आधार पर, भवनों, कार्यस्थल विकास और उपयोगी सुविधाओं व जन सुविधाओं के लिए निवेश राशि 100-1500 करोड़ तक रुपए होगी ।







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