संक्षिप्त नाम, सीमा और प्रारंभ
- “सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005" के नाम से जाना जाता है
- जम्मू और कश्मीर को छोड़कर संपूर्ण भारत पर लागू होता है
- 12 अक्तूबर, 2005 से प्रभावी हुआ है
- यह अधिनियम दिल्ली के सूचना का अधिकार अधिनियम, 2001 से अधिक शक्तिशाली और कठोर है
व्याप्ति
- संसद, विधान सभा द्वारा गठित सभी सरकारी प्राधिकरण, निकाय अथवा संस्थाएं ।
- संसद, उच्चतम न्यायालय/उच्च न्यायालय/निचले न्यायालय और स्वामित्व, नियंत्रित तथा पर्याप्त रुप से वित्तपोषित निकाय ।
- गैर-सरकारी संगठन भी शामिल हैं जो प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रुप से पर्याप्त मात्रा में वित्तपोषित हैं ।
- सरकार के पास यह शक्ति है कि वह ऐसे और निकायों को शामिल करने के लिए आदेश अथवा अधिसूचना जारी कर सकती है ।
नागरिक ही “सर्वेसर्वा’’
- कुछ अपवादों को छोड़कर इस अधिनियम में नागरिकों को लगभग सभी जानकारी देने के लिए प्रावधान है ।
- यह नागरिक को “सर्वेसर्वा’’ बनाता है ।
- अब नागरिक सूचना प्राप्त करके और उसका आलोचनात्मक अध्ययन करके तथा सुविधाजनक प्रश्न उठाकर किसी भी कार्य का सामाजिक लेखापरीक्षा कर सकते हैं ।
सूचना प्रदान करने के लिए जन सूचना अधिकारी
- अधिनियम के तहत प्राप्त आवेदनों को देखने के लिए सरकारी प्राधिकरणों द्वारा नियुक्त किए जाने वाले जन सूचना अधिकारी (22.9.2005 तक) ।
- सरकारी प्राधिकारी की ओर से आवेदन प्राप्त करने के लिए नियुक्त किया जाने वाला सहायक जन सूचना अधिकारी (22.9.2005 तक) ।
- प्रत्येक उप-प्रभाग/उप-जिले में नियुक्त किया जाने वाले सहायक जन सूचना अधिकारी (22.9.2005 तक) ।
- सरकारी प्राधिकारण द्वारा विभाग/संगठन में प्रथम अपील-प्राधिकारी ।
सूचना का अधिकार
सूचना का अधिकार में शामिल है :-
- कार्य, दस्तावेज, रिकार्ड का निरीक्षण ।
- टिप्पणियां, उद्धरण, प्रमाणित प्रतियां लेना ।
- सामग्री के प्रमाणित नमूने लेना ।
- फ्लॉपी, टेप आदि में सूचना प्राप्त करना ।
सूचना की परिभाषा
सूचना का अर्थ है किसी भी रुप में सामग्री और इसमें शामिल है :-
- रिकार्ड, दस्तावेज, ज्ञापन, ई-मेल, विचार, सलाह, आदेश, कार्य-पंजी, संविदा, रिपोर्ट, पेपर, सेंपल आदि ।
आवेदन फार्म भरना
- निर्धारित फार्म
- आवेदक अंग्रेजी में अथवा हिंदी में अथवा स्थानीय भाषा में लिखित रुप में अथवा इलेक्ट्रॉनिक विधि से आवेदन जमा कर सकते हैं ।
- जन सूचना अधिकारी द्वारा नि:शक्त व्यक्तियों को अनुरोध लिखने में सहायता ।
- सूचना प्राप्त करने के लिए कारण आवश्यक नहीं ।
- उत्तर भेजने के लिए पत्राचार के पते के सिवाय आवेदक से संबंधित निजी विवरण आवश्यक नहीं ।
शुल्क
निम्नलिखित शुल्क राशि का निर्धारण, भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किया गया है ।
- आवेदन शुल्क : 10/- रुपए
- अतिरिक्त पृष्ठ : ए-4 अथवा ए-3 आकार के लिए 2/- रुपए प्रति पृष्ठ
- बड़ा आकार : वास्तविक प्रभार
- सेंपल अथवा मॉडल : वास्तविक लागत
- रिकार्ड का निरीक्षण : पहले घंटे के लिए कोई शुल्क नहीं और उसके बाद 5/- रुपए प्रति 15 मिनट
- फ्लॉपी/डिस्केट : 50/-रुपए
- गरीबी रेखा से नीचे रह रहे लोगों के लिए कोई शुल्क नहीं
भुगतान की विधि
शुल्क का भुगतान निम्नलिखित किसी भी रुप में किया जा सकता है :-
- नकद
- डिमांड ड्राफ्ट
- बैंकर चैक
अनुरोध का निपटान
- यदि मांगी गई सूचना जीवन अथवा स्वतंत्रता से संबंधित है, तो उसे 48 घंटों के अंदर दिया जाना है ।
- अन्य मामलों में उत्तर 30 दिनों के अंदर दिया जाता है ।
- यदि आवेदन एसएपीआईओ से प्राप्त होता है, तो इस अवधि में 5 दिन और अधिक लग सकते हैं ।
- तीसरे पक्षकार के मामले में – 40 दिन
अपील
- अपील के दो स्तर हैं ।
- 30 दिनों के अंदर पहली अपील विभाग/संगठन के वरिष्ठ अधिकारी से होते हुए राज्य के जन सूचना अधिकारी को ।
- 90 दिनों के अंदर दूसरी अपील केंद्रीय सूचना आयोग के समक्ष ।
- अपील का निपटान 30 दिनों के अंदर होगा ।
तृतीय पक्षकार के संबंध में सूचना
- जहां आवेदक द्वारा तीसरे पक्षकार के बारे में सूचना मांगी गई है, वहां तीसरे पक्षकार को अपना मामला 5 दिनों के अंदर पेश करने के लिए एक नोटिस भेजा जाएगा ।
- 10 दिनों के अंदर सुनवाई का एक अवसर दिया जाएगा ।
- तृतीय पक्षकार के पास अपील करने का अधिकार होगा ।
सूचना प्रकट करने से छूट
धारा-8 के अनुसार, निम्नलिखित प्रकार की सूचना को दिया जाना अनिवार्य नहीं होगा :-
- भारत की सुरक्षा और अखंडता से संबंधित ।
- न्यायालय द्वारा प्रकाशित किए जाने के लिए निषिद्ध ।
- जिसके प्रकटन से संसद/विधान सभा के विशेषाधिकारों का हनन होता हो ।
- व्यावसायिक रुप से गोपनीय जानकारी और बौद्धिक संपदा ।
- न्यासी संबंध में प्राप्त सूचना ।
- विदेशी सरकार से विश्वास में प्राप्त सूचना ।
- जिसके प्रकटन से जीवन और स्वतंत्रता को खतरा पैदा होता हो ।
- जिससे जांच प्रक्रिया बाधित होती हो ।
- रिकार्ड अथवा विचार-विमर्श सहित मंत्रिमंडलीय दस्तावेज ।
- व्यक्तिगत जानकारी जिसका किसी सार्वजनिक कार्य से कोई संबंध नहीं है ।
- सूचना कापीराइट का उल्लंघन होता हो ।
शास्ति का प्रावधान
- विलंब के प्रत्येक दिन के लिए 250 रुपए दर से जुर्माना लगाया जा सकता है जो अधिकतम 25,000 रुपए तक हो सकता है ।
- निरंतर चूक के मामलों में जन सूचना अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए निर्देश जारी किए जा सकते हैं ।
- सुनवाई का अवसर दिया जाएगा ।
शीघ्र ध्यान देने की आवश्यकता
- सभी अधिकारियों और स्टाफ सदस्यों को इस अधिनियम की ओर उचित ध्यान देने के प्रति संवेदनशील बनाया जाए ।
- कार्यान्वयन के लिए आवश्यक प्रारंभिक उपाय अधिनियम में निर्धारित अनुसूची के अनुसार पूरे किए जाने चाहिए ।
- इस अधिनियम के तहत प्राप्त अनुरोधों के निपटान के दौरान अधिकारियों को सावधान रहने की आवश्यकता है ।
- इस अधिनियम के तहत प्राप्त सभी अनुरोधों का निर्धारित समय सीमा में निपटान किए जाने की आवश्यकता है ।
अन्य महत्वपूर्ण बातें
- जन सूचना अधिकारी की ओर से सहायक जन सूचना अधिकारी आवेदन प्राप्त कर सकता है ।
- प्रथम अपील प्राधिकारी को जन सूचना अधिकारी से वरिष्ठ होना चाहिए ।
- जन सूचना अधिकारी को वरिष्ठ होना चाहिए जो कार्य पर नियंत्रण कर सके और सूचना प्राप्त कर सके क्योंकि उसे अर्ध-न्यायिक सूचना अधिकारी के रुप में करना होता है ।
- भ्रम से बचने के लिए जन सूचना अधिकारी और अपील प्राधिकारी के बीच कार्य का स्पष्ट विभाजन होना चाहिए ।
- पर्याप्त रुप से वित्त पोषित निकायों को सूचना के अधिकार के कार्यक्षेत्र में लाने के लिए अधिसूचित करना ।
आवेदन प्राप्त करने की व्यवस्था
- कार्य को सरल बनाने के लिए आवेदन और शुल्क प्राप्त करने की उचित व्यवस्था की जानी चाहिए ।
- सूचना काउंटर की स्थापना स्वागत काउंटर के निकट की जानी चाहिए ।
- सहायक जन सूचना अधिकारी/ जन सूचना अधिकारी/अपील प्राधिकारी से जनता को संपर्क करने में आसानी होनी चाहिए ।
- मुख्य प्रवेश द्वार पर जन सूचना अधिकारी/ सहायक जन सूचना अधिकारी के नाम, कमरा संख्या आदि को दर्शाने वाला बोर्ड लगा होना चाहिए ।
सचिवों/विभागाध्यक्षों/मुख्य कार्यकारी अधिकारियों की भूमिका
- जन सूचना अधिकारी/ सहायक जन सूचना अधिकारी की नियुक्ति करना ।
- प्रथम अपील प्राधिकारी की नियुक्ति करना ।
- अधिनियम के कार्यक्षेत्र में लाने के लिए उन निकायों का अभिनिर्धारण करना जिनका पर्याप्त रुप से वित्तपोषण किया गया है ।
- अधिनियम के प्रावधानों के बारे में व्यापक प्रचार-प्रसार करना ।
- अधिकारियों और स्टाफ को संवेदनशील बनाने के लिए आंतरिक कार्यशालाएं आयोजित करना
- आवेदन/शुल्क आदि प्राप्त करने के लिए समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करना ।
- मार्गदर्शन के लिए अपेक्षित संख्या में काउंटरों की व्यवस्था करना ।
- स्वयं सूचना तैयार करना और अधिकतम सीमा तक उसका प्रसार करना ।
- सभी संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर निगरानी और नियंत्रण रखना ।







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